पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब श्री राम अयोध्या नगरी छोड़ परमधाम को जाने लगे, तब उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान को अपना राज-काज सौंप दिया. तभी से पवन-पुत्र हनुमान अयोध्या के राजा कहलाये जान लगे.
इसलिए अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं। कहा जाता है हनुमान जी आज भी राम जन्म-भूमि और राम-कोट की रक्षा करते हैं। हनुमान गढ़ी अयोध्या नगरी के प्रमुख स्थानों में से एक है.
यह मंदिर राज-द्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। जहां आज भी छोटी-दीपावली के दिन आधी रात को संकट मोचन का जन्म दिवस मनाया जाता है।मन्दिर के गर्भगृह में राजा शुभान राज गद्दी पर विराजमन हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में आने से उनकी सारी राज गट्टी पर विराज-मान मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंदिर के भीतर भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं अनुरूप कला-कृतियाँ देखी जा सकती हैं, इस भव्य मंदिर के दीवारों स्तंभों पर महीन एवं आकर्षक कला-कृतियों को उकेरा गया है. उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के दरबार की बत्तीस पुतलियों विभिन्न मुद्राओं में मंदिर के स्तंभों पर अंकित हैं.
लाल हरे रंगों से सजी दीवालों पर पड़ती सुबह शाम की खिलती धूप मंदिर प्रांगढ को और खूबसूरत बनाती है.
मंदिर में प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू प्रमुख रूप से चढ़ाये जाते हैं. हनुमान जयंती व अयोध्या में आयोजित होने वाले विभिन्न मेलों के दौरान मंदिर में शर्द्धालुओं का तांता लगा रहता है.
मन्दिर के गर्भ-गृह में हनुमान जी राजा रूप में विराजमान हैं. उनके पीछे भगवान राम का दरबार है, जिसमें भगवान राम, लक्ष्मण और माता-सीता के विगृह हैं.