यह मन्दिर अयोध्या शहर के मध्य में स्थित है.
घनी आबादी के बीच विशाल परिक्षेत्र में यह मन्दिर स्थित है.मान्यतानुसार बड़ी देवकाली मर्यादा पुरुषोत्तम राम की कुल देवी थीं.
त्रेता युग में कौशल्या माता रामवउन केअन्य भाइयों के साथ बचपन में कुल देवी के दर्शन करने इस स्थान पर आयीं थीं. उनके साथ उनकी बहनें सुमित्रा कैकेयी और सरयू माता भीआयीं थीं.
कुछ दिन यहाँ प्रवास के पश्चातवह अपने राजमहल वापस चलीं गयी थी. तभी से यह स्थान विशेष महत्व रखने लगा. महाराजा सुदर्शन ने इस स्थान के महत्व को जानते हुए यहाँ भव्यमंदिर का निर्माण करवाया था.
इस मंदिर के मुख्य स्थान पर तीन देवियाँ विराजमान हैं, जिनमें काली, लक्ष्मी और सरस्वती जी हैं ,मंदिर प्रांगढ में बड़ा सा कुण्ड बना है, जिसमें पानी के प्राकृतिक श्रोत हैं, परिक्रमा मार्ग पर गणेश, लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, फूँकीमाता, हनुमान, अष्ठ भुजा वाहनीदुर्गा, शंकर भगवान, काल भैरव, गौरी माता, शनि देव एवं नवगृह का भी स्थान है.
मन्दिर परिसर में लगभग 200 वर्ष पहले का शीन रेश द्वारा बनवाया गया राम दरबार भी है.
जिसमें राम जी बाल और व्यस्क रूप में विराजमान हैं. बाल रूप में वो एक झूले पर शयन मुद्रामें हैं.
इसके अलावा बाल स्वरुप में हनुमान, कौशल्या माता एवं सरयू माता का भी स्थान दिया गया है.
मन्दिर में दूध नाथ शंकर जी, एक मन्दिर गायत्री माता का भी है सरस्वती और परिसर में सबसे पीछे मरीमाता का स्थानहै,यह मन्दिर अयोध्या शहर के मध्य भाग में स्थित है.
मान्यता है कि आस पास जिलों में बच्चे का जन्म होता है पहला दर्शन बच्चे को भगवान श्रीराम की कुल देवी का कराय जाता है.