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छोटी देव काली – सीता जी की कुल देवी

छोटी देवकाली - सीता जी की कुलदेवी

मान्यता है कि छोटी देवकाली की प्रतिष्ठामाता जानकी की ग्राम देवी या कुलदेवी के रूप में हुयी, जगत जननी माँ सीता जी विवाहोपरांत अपने पितृगृह जनकपुरी से जब अयोध्या के लिए चलीं, तो अपनी कुल-देवी जो कि गौरी मंगला के रूप में थीं, अपने साथ लेआयीं.

इसके पश्चात महाराज दशरथ जी नेअयोध्या स्थित सप्तसागर के ईशानकोण पर एक मन्दिर बनवा दिया. लक्ष्मीस्वरूपा माता सीता जी नित्य निज निवास कनक भवन से आकर माँ छोटी देव कालीका पूजन करती थीं.

ग्राम देवी या कुलदेवी कीआराधना के फल-स्वरूप ही सीताजी को उन्हें भगवान राम जैसा सुयोग्यवर मिला, उसी मान्यता की आस्था आज भी जीवित है.

छोटी देवकाली के दर्शनमात्र को दूर दराज़ से नव-वधुएँ यहाँ आज भी उत्साह से आती हैं और माँ का आशीर्वाद सुयोग्यवर के रूप में पाती हैं, छोटी देवकाली मन्दिर के महत्व का उद्धरण स्कन्द पुराण और रुद्रयामल में मिलता है.

पौराणिक आख्यानों में अत्रिसंहिता के मिथिला खंड में मिथिला की ग्रामदेवी के रूप में उनका उल्लेख है। महर्षि वेदव्यास ने रुद्रया मलतंत्रव स्कंदपुराण में ईशानी देवी के नाम से छोटी देव काली मंदिर का वर्णन किया है।

स्कंदपुराण में ‘विदेह कुल देवी च सर्व मंगल कारिणी श्लोक में इसका उल्लेख है।

इस श्लोक में विस्तार से बताया कि इन सर्व मंगलकारिणी,

स्कंदमाता, शिव प्रिया भवानी का पूजन करने से समस्त प्रकार के इष्ट पूरे होते हैं। रुद्र या मलतंत्र में श्री सीता द्वारा प्रतिदिन छोटी देवकाली मंदिर में पूजन का उल्लेख हैं।कई इतिहास-कारों, दार्शनिकों और पर्यटकों ने भी इसकी महिमा का बखानअपने लेखों में किया है. यह मन्दिर फैजाबाद अयोध्या मार्ग पर हनुमान-गढ़ी से आगे डाकखाने के पास गली में स्थित है.

मन्दिर की भीतरी दीवालों पर लगे शिलापटों पर माँ कीआरती व चालीसा अंकित हैं जो इस मन्दिर की खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं. मन्दिर परिसर में अन्य छोटे मन्दिर भी हैं.

यह मन्दिर कनक भवन के ईशानकोण में स्थापित है. चैत्र-नवरात्र, आषाढ़-नवरात्र, आश्विन-नवरातोत्सव में यहाँ नित्य 1051 बत्ती की भव्य आरती का आयोजन होता है. इसके अलावा वसंत-पंचमी, जानकी जन्मोत्सव, कार्तिक सुदी द्वितीया के अवसर पर सप्त-सतीपाठ, अखण्ड-कीर्तन, कन्या-बरु आभोज, भंडारा आदि का विशेष आयोजन होता है.­

विगृह :

मंदिर के गर्भगृह में माता देवी काली की मूर्ति मुख्यतः सिन्दूरी रंग में स्थित है। मंदिर परिसर की परिधि में 8 देवियों के विभिन्न रूप भी हैं। इससे माता देव काली सहित 9 देवियों के दर्शन का लाभ एक ही स्थान पर मिलता है।

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