यह मन्दिर भी प्राचीन मन्दिरों में माना जाता है. मन्दिर के महंत केअनुसार के राजा दर्शन सिंह के समय लगभग 1748 में भारत के महा राष्ट्रिय ब्राह्मह्मण योगी पं० श्री नर सिंह राव मोघे को एक स्वप्न में हुएआदेश केअनुसार श्री रामचन्द्र जन्मभूमि के पंचायतन विग्रह की प्राप्ति ब्राह्मण योगी को सहस्त्र धारा लक्ष्मण घाट पर स्नान करते समय सरयू नदी में हुई. जिसकी स्थापना उन्होने सुप्रसिद्ध नागेश्वर नाथ के सानिध्य की, जो आज श्रीकाले राममन्दिर के नाम से प्रसिद्ध है।यहाँ हजारों राम भक्त नित्य दर्शन एवं उपासना करअपनी मनौतियों को पूर्ण करते है.इस मन्दिर की विशेषता ये है कि यहाँ सम्पूर्ण श्री रामपंचायतन एक ही शालिग्राम शिला में है जोअन्यत्र दुलर्भ है।
मन्दिर के गर्भ गृह में राम जी उनके वामांग में किशोरी जी, उनके वमांग में भरतलाल जी, रामजी के दक्षिण लक्ष्मणजी, उनके दक्षिण शत्रुघ्न लाल जी श्री रामपंचायतन राज्यअभिषेक का दर्शन है श्री राम पंचायतन के ठीक सामने दक्षिणा भिमुख श्री हनुमान जी का विग्रह भी दुर्लभ है जो कि श्याम वर्ण में है।मन्दिर से सटा हुआ एक छोटा राम नाम का मन्दिर है जिसमें 15 करोड़ ” श्री राम जय राम जय जय राम त्रियो दशाक्षरी मंत्र जोआन्नद रामायण से प्रतिपादित हैउसके साथ हस्तलिखित 4 वेद, 18 पुराण, 6 शास्त्र, तुलसीकृत, अध्यात्म, वाल्मिकीआन्नद एवंअन्यान्न रामायणों का संग्रह, गीता, 108 उपनिषद्ए वं अन्य हिन्दु धर्म संस्कृति के ग्रंथ संग्रहित है जिसकी परिक्रमा से पृथ्वी परिक्रमा का लाभ प्राप्त होता है यह मन्दिर प्रातः 4.30 से 11.30 तक एवं सायं काल 4.00 से 9.00 तक दर्शना र्थ खुला रहता है भगवान का नित्यदर्श न तो सर्वसुलभ है ही परन्तु श्री रामनवमी के दिन प्रभु श्री कालेराम भगवान के दर्शनों का विशेष महत्व है।