यह मन्दिर अयोध्या के ह्रदय कहे जाने वाले रामकोट में राम जन्म भूमि के निकट स्थित है. यह स्थाम यूँ तो श्री राम के पुत्र लव कुश जी का है, पर यहाँ सावन झूला महोत्सव और तुलसी शालिगराम विवाह अत्यंत प्रचलित है. राम जन्म भूमि के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भगवान श्री राम के पुत्रगण लव कुश के दर्शन अवश्य करते हैं. मन्दिर को कुछ विशेष अवसरों पर भव्यता के साथ सजाया जाता है. सावन माह में पूरे महीने रुद्राभिषेक होता है, सावन में मंदिर प्रांगढ में सावन झूला पड़ता है तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रवाधनी एकादशी के अवसर पर अयोध्या प्रसिद्द तुलसी माता और शालिग राम का विवाह बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है.
विगृह : मन्दिर के गर्भ गृह में भगवान श्री राम का दरबार सजा है, जिसमें करीब 400 वर्ष पुराने भगवान राम और माता सीता के विगृह भी रखे हुए हैं. इसके अलावा यहाँ द्वादश लिंग और स्फटिक के शिवलिंग भी विराजमान हैं. दतियाँ कलां की कुल देवी बंगलामुखी का भी स्थान विराजमान है.
पूजा विधि : यह मन्दिर प्रातः 6:30 बजे आम दर्शन के लिए मंगला आरती के बाद खुलता है, प्रातः 8 बजे बाल भोग आरती, दोपहर 11:30 बजे मध्यान्ह आरती, सायं 6 बजे संध्या आरती और रात्री शयन आरती 8 बजे की जाती है.