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अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश

अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखे हुए नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए।
Teerth Ayodkya Tourism & film production.
Spiritual Tourism Of India का उद्देश्य
:-
प्रमुख उद्देश्य अयोध्या धाम के पर्यटन को बढ़ावा देना
  • प्रभु श्री राम की अयोध्या के महत्व और स्थलीय जानकारियों को वैश्विक पटल पर रखना
  • अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुलभ और सफल यात्रा का अनुभव देना
  • हमारी विशेष ऑनलाइन सेवा से घर बैठे पूजन, कर्मकाण्ड, आरती, एवं मन्दिर के दर्शन सुलभ करवाना
  • आस्था के नाम पर होने वाली ठगी और असुविधा से यात्रियों को आगाह करना
  • अप्रवासी भारतीय, विदेशी सैलानियों के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध करवाना
  • अयोध्या में मनाये जाने वाले त्योहार, परिक्रमा, स्नान, मेला आयोजनों से यात्रियों को जोड़ना
  • पर्यटकों के भावपूर्ण अनुभवों को हमारी वेबसाईट पर जगह देना
अयोध्या पर्यटन के दौरान हमारे पर्यटक विशेष ध्यान दें
क्या करें
  • उत्तर प्रदेश की परंपरा और संस्कृति का सम्मान करें
  • धार्मिक स्थानों के दर्शन के दौरान सभ्य कपड़े ही पहनें
  • कैवल आधिकारिक विनिमय काउंटर और बैंकों से विनिमय करें
  • केवल सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त गाइड को ही मार्गदर्शन देने को चुनें
  • बुद्धिमानी से तथा सोच समझ कर ही अपने पैसे खर्च करें
  • यहाँ ज्यादातर इस्तेमाल होने वाले स्थानीय भाषा के कुछ शब्द जरुर सीखें
  • हस्तशिल्प और यहाँ बनने वाली वस्तुएं अवश्य खरीदें, अन्यत्र कहीं नहीं मिलती हैं

क्या न करें
  • कूड़ा इधर न डाल के प्रदेश को स्वच्छ एवं हरा भरा बनाने में हमारा सहयोग करें
  • कोई आपत्तिजनक तस्वीरें न लें
  • सार्वजनिक स्थानों एवं धार्मिक स्थलों पर धूम्रपान, मद्दपान तथा ड्रग्स का सेवन न करें
  • यहाँ मंदिरों के दर्शन के दौरान उनके नियमों को न तोड़ें
  • गाय इत्यादि पूजनीय जानवरों का न तो शिकार करें नई ही उन्हें चोट पहुंचाएं
  • किसी भी धर्म के बारे में कोई आपत्तिजनक टिप्पड़ी न करें
  • किसी भी अनाधिकृत एजेंट से होटल, जहाज या रेलवे टिकेट न बुक कराएँ
  • किसी भी बिना लाइसेंस आपरेटर से वाहन किराए पर मत लें

इन सब दिशा निर्देशों का पालन करिए और अपने सफ़र को सुखमय एवं आनंदपूर्ण बनाएं

संस्कृति व् भाषा-

धर्मनगरी अयोध्या की संस्कृत मधुर अवधि भाषा है अयोध्या नगरी में अपना पन है अयोध्या के निवासी अपने अतिथियों का स्वागत अतिथि देवों भवः की तरह राम-राम, सीता राम कह कर करते है- देवनागरी संस्कृति भाषा में पूजन कार्य संपन्न किया जाता है

भोग प्रसाद –

अयोध्या में भक्ति भाव से पूर्ण भक्त जब अपने अराध्य से मिलता है तो वह भाव पूर्ण प्रसाद अपने अराध्य को अर्पित करता है जो मंदिरों के पास लगी भोग प्रसाद की दुकानों से प्राप्त करता है भोग में बेसन व् बूंदी. लड्डू, खोये का पेंडा, इलाइची दाना अर्पित करता है. बंदरों को चना भोग के रूप में अर्पित करता है ..

माला फूल अर्पण-

मंदिरों के बाहर सजी फूलों की दुकानों से पर्यटक भक्ति भाव से फूल मालाओं को लेता है और भगवान् को अर्पित करता है हनुमान जी तुलसी दल पसंद है तो हनुमानगढ़ी में तुलसी दल चढ़ाया जाता है. सिंदूर अर्पित किया नाता है

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